जन्म तिथि से इष्ट देवता जानें

इष्ट देवता हमारी आत्मा और हृदय से जुडी वो दैवीय ऊर्जा है जो हमारे जीवन में एक संरक्षक व् मार्गदर्शक के रूप में समय-समय पर अनुभव होती है। हमारी आस्था व् अनुभव का गहरा सम्बन्ध इष्ट के साथ होता है व्यक्ति स्वतः ही मन से उनकी ओर आकर्षित हो जाता है। यह इष्ट देवता कैलकुलेटर ज्योतिष विश्लेषण द्वारा आपके इष्ट देव की सटीक जानकारी प्रदान करता है। इष्ट की आराधना शीघ्र फलित होती है क्योकि व्यक्ति के इष्ट देवता उसकी अंतरात्मा से जुड़े माने गए है व् जीवन में आने वाली कठिनाईयों व् परिस्थितियों से निकलने का मार्ग सबसे पहले इष्ट देवता ही प्रदान करते है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इष्ट देवता की गणना करें।



प्रत्येक व्यक्ति का अपने इष्ट देवता के साथ परस्पर अंतर्मुखी सम्बन्ध होता है उनकी भक्ति से व्यक्ति को सुरक्षा, स्नेह, आंतरिक सुख व् शांति का अनुभव होता है। वैदिक ज्योतिष में अपने इष्ट को आसानी से जान सकते है परन्तु आतंरिक भाव से उसके इष्ट के प्रति झुकाव सामान्यतः देखा जाता है। आप इस फ्री कैलकुलेटर से कुंडली के अनुसार इष्ट देवता ज्ञात कर सकते है। व्यक्ति के जीवन में उन्नति व् सद्गति को प्राप्त करने में उसके इष्ट देव एक माध्यम बनते है। आप बचपन से जिस बिन देवी देवता की पूजा करते है उनके साथ अपने कुंडली के अनुसार दिए गए इष्ट देवता की पूजा इत्यादि करने पर विपत्ति से बचाव व् इच्छा की पूर्ति संभव है।

इष्ट देवता को जानने का उदेश्य केवल उनकी पूजा साधना से नहीं अपितु उनसे प्रेम व् आस्था से परिपूर्ण अटूट सम्बन्ध स्थापित करने से है। ये आपके मुख्य देवता हैं, जिनकी उपासना आपको हर प्रकार की आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रगति प्राप्त करने के साथ-साथ जीवन में किए जाने वाले पाप कर्मों के नियंत्रण और शुद्धि के लिए करनी चाहिए। व्यक्ति के इष्ट उसके प्रतिदिन के फैसलों, संघर्ष, रिश्ते व् भविष्य की योजना इत्यादि में सलाहकार होते है। इष्ट व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक स्पष्टता की प्राप्ति होती है। कुल देवता और ईस्ट देवता भिन्न है कुल देवता पूरे परिवार की सुरक्षा और उन्नति के अधिष्ठाता माने जाते हैं व् प्रचलित पारिवारिक परम्पराओं से उनकी पूजा व् अनुष्ठान किये जाते है जबकि इष्ट देवता का सम्बन्ध पूर्णतः व्यक्तिगत एवं आत्मीय होता है जो जीवन के हर उतार-चढ़ाव में हमें मार्गदर्शन व् सहारा प्रदान करते है। इष्ट देवता की सच्ची भक्ति और नियमित पूजा दुसरो की तुलना में तेजी से जीवन में स्वास्थ्य, धन और सफलता प्राप्त करने में सहायक होती है इष्ट के आशीर्वाद से आप बड़ी कठिनाई में भी शीघ्र उबर जाते है।

कुंडली के अनुसार इष्ट देवता निकालना

जन्म कुंडली में इष्ट देवता कैसे ज्ञात करें इसके ज्योतिष में कई मत है परन्तु महर्षि जैमिनी की इष्ट देव गणना पद्धति को सबसे सटीक और प्रामाणिक माना जाता है। सर्वप्रथम लग्न कुंडली के आत्मकारक ग्रह का निर्धारण किया जाता है लग्न कुंडली में जिस ग्रह का अंश (डिग्री) सबसे अधिक होता हैं, वही आत्मकारक ग्रह कहलाता है। इसके पश्चात नवमांश कुंडली में आत्मकारक ग्रह की स्थिति देखी जाती है, जिसे कारकांश ने कहा जाता है। कारकांश से बारहवें भाव का विशेष महत्व है। इस भाव में स्थित ग्रह तथा उस भाव के स्वामी के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण किया जाता है। नवमांश का बारहवां भाव मोक्ष, त्याग, आध्यात्मिकता तथा इष्ट देवता का सूचक माना जाता है।

जन्म कुंडली के आधार पर इष्ट देवता विश्लेषण करना एक जटिल प्रक्रिया है लेकिन आप यहाँ फ्री इष्ट देवता कैलकुलेटर में अपना जन्म विवरण डालकर केवल एक क्लिक में सटीक विश्लेषण प्राप्त करते है हम कैलकुलेटर को ज्योतिष एक्सपर्ट की सलाह एवं प्रमाणित विधियों के आधार पर नियमित रूप से अपडेट करते रहते हैं जिससे परिणामों में सटीकता बनी रहती है और त्रुटि की संभावना अत्यंत न्यूनतम हो जाती है।

पंचम भाव से इष्ट देवता

लग्न से पंचम भाव पूर्वजन्म के संचित पुण्यकर्मो व् स्वाभाविक पसंद से जुड़ा होता है अतः ज्योतिष जानकर पूर्व के अच्छे कर्म आगे बढ़ाकर व् व्यक्ति के स्वभाव के अनुकूल इष्ट देव का निर्धारण करते है परन्तु यह तरीका सभी के मत से मेल नहीं खाता है। पंचम भाव से इष्ट देवता का सटीक निर्धारण नहीं बल्कि भक्ति की दिशा और देवता के प्रकार का संकेत है। कुछ ज्योतिष इष्ट को कुंडली से न जोड़कर केवल व्यक्ति के स्वयं के भाव व् सोच से जुड़ा मानते है।

लग्न के अनुसार इष्ट देवता निकलने लिए व्यक्ति के लग्न से पांचवे घर में विद्यमान राशि के स्वामी ग्रह से सम्बंदित देवी/देवता को उसका इष्ट मान लिया जाता है, पाचवे भाव में यदि कोई ग्रह उपस्थित हो तब भी राशि स्वामी को ही महत्ता दी जाती है ।

लग्न से इष्ट देवता

लग्न से इष्ट निकालने की तालिका नीचे दी गयी है यदि आपको अपना लग्न ज्ञात है तो पंचम भाव के आधार पर अपने इष्ट देवी/देवता का पता कर सकते है।

लग्न इष्ट
मेषभगवान शिव, भगवान राम
वृषभभगवान गणेश, माता दुर्गा, भगवान विष्णु
मिथुनदेवी (माता के सभी रूप)
कर्कभगवान हनुमान, भगवान कार्तिकेय
सिंहभगवान विष्णु
कन्याभगवान हनुमान, माता काली
तुलाभगवान हनुमान, माता काली
वृश्चिकभगवान विष्णु
धनुभगवान हनुमान, भगवान कार्तिकेय
मकरदेवी (माता के सभी रूप)
कुंभभगवान गणेश, माता दुर्गा, भगवान विष्णु
मीनदेवी (माता के सभी रूप), भगवान कृष्ण

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